Nigahe Yaar Jise Ashna e Raaz by Hasrat 'Mohani': Ghazal (in Hindi)
- ग़ज़ल निगाहे यार जिसे आशना ए राज़ करे, वह क्यों न ख़ूबी ए क़िस्मत पे अपनी नाज़ करे. दिलों को फ़िक्र ए दो आलम से कर दिया आज़ाद, तेरे जुनूं का ख़ुदा सिलसिला दराज़ करे. ख़िरद का नाम जुनूं पड़ गया जुनूं का ख़िरद, जो चाहे आप का ह़ुस्न करिश्मा साज़ करे. तेरे सितम से मैं ख़ुश हूं कि ग़ालीबन यूं भी, मुझे वह शामिल ए अरबाबे इम्तियाज़ करे. ग़म ए जहां से जिसे हो फ़राग़ की ख़्वाहिश, वह उन के दर्द ए मुह़ब्बत से साज़ बाज़ करे. उम्मीदवार हैं हर सिम्त आशिक़ों के गिरोह, तेरी निगाह को अल्लाह दिल नवाज़ करे. तेरे करम का साज़ावार तो नहीं 'ह़सरत', अब आगे तेरी ख़ुशी है जो सरफ़राज़ करे. ...