Hue Namwar Benishaan by Ameer Meenai (in Hindi)
– ग़ज़ल हुए नामवर बे निशां कैसे कैसे, ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे. तेरी बांकी चितवन ने चुन चुन के मारे, नुकीले सजीले जवां कैसे कैसे. न गुल हैं न ग़ुंचे न बूटे न पत्ते, हुए बाग़ नज़रे ख़िज़ा कैसे कैसे. यहां दर्द से हाथ सीने पे रखा, वहां उनको गुज़रे गुमां कैसे कैसे. हज़ारों बरस की है बुढ़िया ये दुनिया, मगर ताकती है जवां कैसे कैसे. तेरे जां निसारों के तेवर वही हैं, गले पर हैं ख़ंजर रवां कैसे कैसे. जवानी का स़दक़ा ज़रा आंख उठाओ, तड़पते हैं देखो जवां कैसे कैसे. ख़िज़ा लूट ही ले गई बाग़ सारा, तड़पते रहे बाग़बां कैसे कैसे. अमीर अब सुख़न की बड़ी क़द्र होगी, फले फूलेंगे नुकत ए दां कैसे कैसे. 'अमीर' मीनाई ------------------------------------- मुश्किल अलफ़ाज़ : ☆ नामवर --- नामवाला. ☆चितवन --- नज़र, तिरछी निगाह. ☆ ग़ुंचे ...