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Bulbul Jab Se Toone Do by Ameer Meenai: Ghazal (in Hindi)

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-            ग़ज़ल जब से  बुलबुल  तूने दो  तिनके लिए, टूटती  हैं  बिजलियां   इन   के   लिए. तुंद  मय और  ऐसे कमसिन  के लिए, साक़िया  हल्की सी  ला इन के  लिए. है  जवानी  ख़ुद  जवानी  का  सिंगार, सादगी  गहना  है  इस सिन  के  लिए. पाक   रखा  पाक  दामन  से  ह़िसाब, बोसे  भी गिन के  दिए  गिन  के लिए. सब  ह़सीं   हैं  ज़ाहिदों  को  नापसंद, अब  कोई  ह़ूर आएगी  इन  के  लिए. कौन    वीराने    में    देखेगा    बहार, फूल  जंगल  में  खिले  किन  के लिए. दिन  मेरा   रोता   है  मेरी   रात   को, रात  रोती  है   मेरी ...

Ibne Mariyam by Mirza Ghalib : Ghazal (in Hindi)

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       -                    ग़ज़ल इब्ने   मरियम  हुआ   करे   कोई, मेरे   दुःख   की    दवा करे  कोई. चाल  जैसे  कड़ी कमान का तीर, दिल  में  ऐसे  कि  जा  करे  कोई. शरअ  व  आईन  पर मदार सही, ऐसे  क़ातिल  का  क्या करे कोई. बात   पर  वां  ज़ुबान  कटती  है, वो   कहे   और  सुना  करे  कोई. बक रहा हूँ जुनूं में क्या क्या कुछ, कुछ  न  समझे  ख़ुदा  करे  कोई. न  सुनो   गर   बुरा   कहे    कोई, न  कहो   अगर  बुरा  करे   कोई. कौन  है  जो  नहीं   है  हाजतमंद, किसकी  हाजत  रवा   करे  कोई. रोक   लो   गर  ग़लत  चले  कोई,...

Sare Jahan Se Achha by Allama Iqbal: Ghazal (in Hindi)

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-           तराना ए हिन्द सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा, हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिस्तां हमारा. परबत वो सबसे ऊंचा हमसाया आसमां का, वह संतरी हमारा वह पासबां हमारा. ग़ुरबत में हो अगर हम रहता है दिल वत़न में, समझो वहीं हमें भी दिल हो जहां हमारा. गोदी में खेलती हैं उसकी हज़ारों नदियां, गुलशन है जिनके दम से रश्क ए जहां हमारा. ऐ आबरुदे गंगा वह दिन है याद तुझको, उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा. मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिन्दुस्तां हमारा. यूनान व मिस्र रोमा सब मिट गए जहां से, अब तक मगर है बाक़ी नामो निशां हमारा. कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौरे ज़मां हमारा. इक़बाल कोई मह़रम अपना नहीं जहां में, मालूम क्या किसी को दर्द-ए-निहां हमारा.              अल्लामा 'इक़बाल' ----------------------------------- मुश्किल अल्फ़ाज़:     ☆ गुलिस्ता...

Hungama Hai Kyun Barpa by Akbar Allahabadi :Ghazal (in Hindi)

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-             ग़ज़ल    हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है,    डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है.    ना तजुर्बाकारी से  वाइज़ की ये बातें हैं,    इस रंग को क्या जाने पूछो तो कभी पी है.    उस मय से नहीं मतलब दिल जिससे है बेगाना,    मक़सूद है उस मय से दिल ही में जो खिंचती है.    ऐ शौक़ वही मय पी ऐ होश ज़रा सो जा,    मेहमान ए नज़र इस दम एक बर्क़ ए तजल्ली है.    वां दिल में के सदमे दो यां जी में कि सब सह लो,    उनका भी अजब दिल है मेरा भी अजब जी है.    हर ज़र्रा चमकता है अनवारे इलाही से,    हर सांस यह कहती है हम हैं तो ख़ुदा भी है.    सूरज में लगे धब्बा फ़ितरत के करिश्मे हैं,    बुत हमको कहे काफ़िर अल्लाह की मर्ज़ी है.    तालीम का शोर ऐसा तहज़ीब का गुल इतना,    बरकत जो नहीं होती नीय...

Insha Ji Utho by Ibne Insha: Ghazal(in Hindi)

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-                 ग़ज़ल      इंशा जी उठो अब कूच करो इस शहर में जी को लगाना क्या,      वह़शी को सुकूं से क्या मत़लब जोगी का नगर में ठिकाना क्या.      इस दिल के दरीदा दामन को देखो तो सही सोचो तो सही,      जिस झोली में सौ छेद हुए उस झोली का फैलाना क्या.      शब बीती चांद भी डूब चला ज़ंजीर पड़ी दरवाज़े में,      क्यों देर गए घर आए हो सजनी से करोगे बहाना क्या.      फिर हिजर की लंबी रात मियां संजोग की तो यही एक घड़ी,      जो दिल में है लब पर आने दो शरमाना क्या घबराना क्या.      उस रोज़ जो उनको देखा है अब ख़्वाब का आलम लगता है,      उस रोज़ जो उन से बात हुई वह बात भी थी अफ़साना क्या.      उस ह़ुस्न के सच्चे मोती को हम देख सके पर छू ना सके,      जिसे देख सके पर छू न सके वह दौलत क्या वह ख़ज़ाना ...

Ulti Ho Gayi Sab Tadbeerein by Meer Taqi Meer :Ghazal (in Hindi)

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-               ग़ज़ल      उलटी हो गई सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया,      देखा इस बीमारी ए दिल ने आख़िर काम तमाम किया.      अहदे जवानी रो रो काटा पीरी में लीं आँखें मूँद,      यानी रात बहुत थे जागे स़ुबह़ हुई आराम किया.      नाहक़ हम मजबूरों पर ये तोहमत है मुख़्तारी की,      चाहते हैं सो आप करें हैं हमको अबस बदनाम किया.      सरज़द हम से बेअदबी तो वहशत में भी कम ही हुई,      कोसों उस की ओर गए पर सजदा हर हर गाम किया.      किसका काअबा कैसा क़िब्ला कौन ह़रम है क्या अह़राम,      कूचे के उसके बाशिन्दों ने सबको यहीं से सलाम किया.      काश अब बुर्क़ा मुंह से उठावे वरना फिर क्या ह़ासिल है,      आंख मूंदे पर उन ने गो दीदार को अपने आम किया.    ...

Ek Baar Kaho Tum Meri Ho by Ibne Insha :Geet (in Hindi)

-               गीत: हम घूम चुके बस्ती बन में एक आस की फांस लिए मन में कोई साजन हो कोई प्यारा हो कोई दीपक हो कोई तारा हो जब जीवन रात अंधेरी हो      इक बार कहो तुम मेरी हो.. जब सावन बादल छाए हो जब फागुन फूल खिलाए हो जब चंदा रूप लुटाता हो जब सूरज धूप नहाता हो या शाम ने बस्ती घेरी हो      इक बार कहो तुम मेरी हो.. हां दिल का दामन फैला है क्यूं गोरी का दिल मैला है हम कब तक पीत के धोखे में तुम कब तक दूर झरोखे में कब दीद से दिल को सेरी हो      इक बार कहो तुम मेरी हो.. क्या झगड़ा सूद ख़सारे का ये काज नहीं बंजारे का सब सोना रूपा ले जाए सब दुनिया दुनिया ले जाए तुम एक मुझे बहुतेरी हो      इक बार कहो तुम मेरी हो...            इब्ने इंशा ------------------------------ मुश्किल अल्फ़ाज़: ...