Posts

Tere ishq ki intihaa by Allama Iqbal (in Hindi)

Image
          ग़ज़ल     तेरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूं, मेरी सादगी देख क्या चाहता हूं. सितम हो कि हो वादा ए बे हिजाबी, कोई बात सब्र आज़मा चाहता हूं. यह जन्नत मुबारक रहे ज़ाहिदों को, कि मैं आपका सामना चाहता हूं. ज़रा सा तो दिल हूं मगर शोख़ इतना, वहीं लन तरानी सुना चाहता हूं. कोई दम का मेहमां हूं ऐ अहले महफ़िल, चिराग़ ए सहर हूं बुझा चाहता हूं. भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी, बड़ा बे अदब हूं सज़ा चाहता हूं. अल्लामा इक़बाल मुश्किल अल्फ़ाज़:      ☆  इंतिहा --- आख़िर, हद, अंजाम.      ☆   सितम --- ज़ुल्म, सख़्ती.      ☆   बे हिजाबी --- बे पर्दा, चेहरा दिखाना.      ☆   सब्र आज़मा --- सब्र आज़माने वाली.      ☆   जन्नत --- स्वर्ग.      ☆   ज़ाहिद --- धार्मिक, इबादत गुज़ार.      ☆   शोख़ --- चंचल.      ☆   लन तरानी --- शोखी, ढींग, तू मुझे नहीं देख सकता.     ...

Ghazab Kiya Tere Wade by Daagh Dehlvi (in Hindi)

Image
-                     ग़ज़ल (1) ग़ज़ब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया, तमाम रात क़यामत का इंतज़ार किया. (2) हंसा हंसा के शब ए वस्ल अश्कबार किया, तसल्लियां मुझे दे दे के बेक़रार किया. (3) किसी तरह जो न उस बुत ने ऐतबार किया, मेरी वफ़ा ने मुझे ख़ूब शर्मसार किया. (4) ये किसने जलवा हमारे सरमज़ार किया, कि दिल से शोर उठा हाए बेक़रार किया. (5) न आए राह पे वह इज्ज़ बेशुमार किया, शब ए विसाल भी मैंने  तो इंतज़ार किया. (6) सुना है तेग़ को क़ातिल ने आबदार किया, अगर ये सच है तो बेशुबह हम पे वार किया. (7) तुझे तो वादा ए दीदार हम से करना था, ये क्या किया कि जहां को उम्मीदवार किया. (8) कहां का सब्र कि दम पर है बन गई ज़ालिम, बातंग आए तो हाल ए दिल आशकार किया. (9) तड़प फिर ऐ दिल ए नादां के ग़ैर कहते हैं, अख़ीर कुछ न बनी सब्र अख़्तियार किया. (10) ये दिल को ताब कहां है कि हो माल ए अंदेश, उन्होंने वादा किया उस ने ऐतबार किया. (11) मिले जो यार की शोख़ी से उसकी बेचैनी, तमाम रात दिल ए मुज़तर्ब को प्यार कि...

Kuchh yaadgaar e shahar: Ghazal by Nasir Kazmi (in Hindi)

Image
-                ग़ज़ल कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही चलें, आए  हैं  इस गली  में  तो पत्थर ही ले चलें. यूं  किस तरह  कटेगा कड़ी धूप का सफ़र, सर पर ख्याल  ए यार की चादर ही ले चलें. रंज ए सफ़र की कोई  निशानी तो पास हो, थोड़ी सी ख़ाक कूचा ए दिलबर ही ले चलें. यह  कह  के छेड़ती है हमें दिल गिरफ़्तगी, घबरा  गए  हैं  आप  तो  बाहर ही ले  चलें. इस  शहर  ए  बेचिराग़ में जाएगी  तू कहां, आ अय शब ए फ़िराक़ तुझे घर ही ले चलें.                     नासिर काज़मी मुश्किल अल्फ़ाज़:      ☆  यादगार ए शहर सितमगर ---- ज़ुल्मी के शहर की याद.      ☆  रंज ए सफ़र ---- सफ़र का दुख.      ☆  कूचा ए दिलबर ---- दिलबर की गली.      ☆  दिल गिरफ़्तगी ---- दिल की क़ैद.      ☆  शहर ए बेचिराग़ ---- अंधेर...

Ibtidaye ishq hai rota hai kya: Ghazal by Meer Taqi Meer (in Hindi)

Image
.           ग़ज़ल इब्तिदा ए इश्क़ है रोता है क्या, आगे आगे देखिए होता है क्या. क़ाफ़िले में सुबह के एक शोर है, यानी ग़फ़िल हम चले सोता है क्या. सब्ज़ होती ही नहीं ये सर ज़मीं, तुख़्म ख़्वाहिश दिल में तू बोता है क्या. ये निशाने इश्क़ हैं जाते नहीं, दाग़ छाती के अब्स धोता है क्या. गैरत ए युसुफ़ है ये वक़्त अज़ीज़, मीर इसको राएगां खोता है क्या.                मीर तक़ी मीर नोट  : मीर तकी मीर के असल दीवान में पहला शेर कुछ बदला है जो कि नीचे दिया गया है, लेकिन ऊपर ग़ज़ल में वही शेर दिया गया है जो लोगो में सदियों से मकबूल हैं. ये पता नहीं चलता है कि ये बदलाव उन्होंने खुद बाद में किया था या दूसरे लोगो ने.            राह ए दौरे इश्क़ में रोता है क्या,            आगे आगे देखिए होता है क्या. मुश्किल अल्फ़ाज़:      ☆  इब्तिदा --- शुरुवात.      ☆ ...

Kamar bandhein hue chalne:Ghazal by Insha Allah Khan (in Hindi)

Image
-              ग़ज़ल कमर बांधे हुए चलने को      यां  सब यार बैठे हैं, बहुत आगे गए  बाक़ी      जो हैं तैयार बैठे हैं. ना छेड़ ऐ निकहत ए बाद ए बहारी      राह लग अपनी, तुझे  अठखेलियां  सूझी  हैं      हम बेज़ार बैठे हैं. तसव्वुर अर्श पर है और      सर है पाए साक़ी पर, ग़रज़ कुछ और धुन में      इस घड़ी मय ख़्वार बैठे हैं. ये अपनी चाल है उफ़तादगी से      अब के पहरो तक, नज़र आया जहां पर      साया ए दीवार बैठे हैं. बसान ए नक़्श ए पाए      रहरवां कोए तमन्ना में, नहीं उठने की ताक़त      क्या करें लाचार बैठे हैं. कहां सब्र व तहम्मुल      आह नंग व नाम क्या शै है, यहां रो पीट कर इन सब      को हम यकबार बैठे हैं. नजीबों का अजब कुछ      हाल है इस दौर में यारो, जहां पूछो यही कहते  ...

Sau baar chaman mahka by Sufi Tabassum: Ghazal (in Hindi)

Image
-                   ग़ज़ल सौ बार चमन महका, सौ बार बहार आई, दुनिया की वही रौनक़ दिल की वही तन्हाई. एक लहज़ा बहे आंसू, एक लहज़ा हंसी आई, सीखे हैं नए दिल ने अंदाज़े शिकेबाई. ये रात की ख़ामोशी ये आलमे तन्हाई, फिर दर्द उठा दिल में फिर याद तेरी आई. इस आलमे वीरां में क्या अंजुमन आराई, दो रोज़ की महफ़िल है एक उम्र की तन्हाई. रोने से क्या है हासिल अय दिले सौदाई, इस पार भी तन्हाई उस पार भी तन्हाई. इस मौसमे गुल ही से बहके नहीं दीवाने, साथ अब्रे बहारां के वह ज़ुल्फ भी लहराई. हर दर्दे मुहब्बत से उलझा है ग़मे हस्ती, क्या क्या हमें याद आया जब याद तेरी आई. चर्के वह दिए दिल को महरुमिए क़िस्मत ने, अब हिजर भी तन्हाई और वस्ल भी तन्हाई. जलवों के तमन्नाई जलवों को तरसते हैं, तस्कीन को रोएंगे जलवों के तमन्नाई. देखे हैं बहुत हमने हंगामे मुहब्बत के, आग़ाज़ भी रुसवाई अंजाम भी रुसवाई. दुनिया ही फ़क़त मेरी हालत पे नहीं चौंकी, कुछ तेरी भी आंखों में हल्की सी चमक आई. औरों की मुहब्बत के दोहराए हैं अफ़सान...

Bulbul Jab Se Toone Do by Ameer Meenai: Ghazal (in Hindi)

Image
-            ग़ज़ल जब से  बुलबुल  तूने दो  तिनके लिए, टूटती  हैं  बिजलियां   इन   के   लिए. तुंद  मय और  ऐसे कमसिन  के लिए, साक़िया  हल्की सी  ला इन के  लिए. है  जवानी  ख़ुद  जवानी  का  सिंगार, सादगी  गहना  है  इस सिन  के  लिए. पाक   रखा  पाक  दामन  से  ह़िसाब, बोसे  भी गिन के  दिए  गिन  के लिए. सब  ह़सीं   हैं  ज़ाहिदों  को  नापसंद, अब  कोई  ह़ूर आएगी  इन  के  लिए. कौन    वीराने    में    देखेगा    बहार, फूल  जंगल  में  खिले  किन  के लिए. दिन  मेरा   रोता   है  मेरी   रात   को, रात  रोती  है   मेरी ...